Sunday, May 10, 2009

बंधन

बन्धन दो जीवन भर का ,बन्धन का आभास न दो ,मृगतृष्णा हो जाए जीवन ,मुझको ऐसी प्यास न दो .मुट्ठी भर दे दो अपनापन ,ये सारा आकाश न दो ,बस कुछ पल दे दो अपने ,लोगों का उपहास न दो ,कुछ पल का है प्यार तुम्हारा,तुम ऐसा विश्वास न दो ,सुधापान अधिकार मुझे दो ,यूँ निर्जल उपवास न दो ,प्रणय दान दे दो मुझको ,मुझको झूठी आस न दो ,अंतिम हो जाए जीवन की ऐसी कोई साँस न दो ,

4 comments:

  1. आशा ही जीवन है मेरे दोस्त। इतनी निराशा क्यों।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  2. sabdo ka prayog bahut accha hai . vichar utne hi acche .

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  3. gagar me sagar yah post........ pahli baar aapke blog par aana hua .. nice blog hai...

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